देश में कुल मिलाकर 688 जिले हैं। हर जिले का प्रशासन भारतीय प्रशासनिक सेवा के अफसर, यानी आईएएस अधिकारी के हवाले होता है, जिसे कहीं जिलाधीश, कहीं जिलाधिकारी, कहीं जिला कलक्टर, तो कहीं जिला मजिस्ट्रेट कहा जाता है। लेकिन हर मामले में उनकी भूमिका और जिम्मेदारियां लगभग समान होती हैं। उन्हें जिले से राजस्व का संग्रह करना होता है और प्रशासन संभालना होता है।
अक्सर जिले के इस अधिकारी के दफ्तर पर लगने वाली लोगों की लाइन किसी विधायक या सांसद के घर पर लगने वाली लाइन से ज्यादा लंबी होती है। जिले में रहकर उसके विकास का रास्ता निकालना कुछ के लिए अवसर की तरह होता है, तो इसके लिए मिली सत्ता कुछ के सिर चढ़कर भी बोलती है।
हाल ही में मेरी मुलाकात रॉय महिमापत रे से हुई, वह बोकारो के जिलाधिकारी हैं। महज 30 वर्ष के महिमापत रे डिजिटल उपकरणों और सेवाओं का बखूबी इस्तेमाल करते हैं। वह फेसबुक और सोशल मीडिया पर भी काफी सक्रिय हैं। हर शाम वह हैशटैग बोकारो से जुड़ जाते हैं और उन सारे ट्वीट्स का जबाव देते हैं, जो उनके और प्रशासन के लिए होते हैं। साथ ही उन्होंने जिले की निगरानी और प्रबंधन के लिए व्हाट्सएप का इस्तेमाल भी शुरू किया है। इसके जरिये वह ब्लॉक के अफसरों से निरंतर संपर्क में रहते हैं। वह बताते हैं, ‘व्हाट्सएप जानकारी पाने का बहुत अच्छा साधन है। तालमेल बिठाने, जायजा लेने, जवाबदेही और नए तरीके खोजने में भी मददगार है’।
जब हम यह बात कर रहे थे, तब उनका ध्यान अचानक अपने स्मार्टफोन पर गया और वह कुछ टाइप करने लगे। उसके बाद उन्होंने फोन मुझे पकड़ा दिया और वह संदेश दिखाया, जो उसी समय उन्होंने भेजा था। मैंने पाया कि वह व्हाट्सएप के 20 ग्रुप में सक्रिय थे, जिसमें एक मनरेगा का ग्रुप था, एक बोकारो योजना बनाओ अभियान था, एक पंचायत चुनाव 2015 था, एक डेवलपमेंट बोकारो था, तो एक स्वच्छ बोकारो भी था। महिमापत रे ने बताया कि हर रोज ऐसे कई ग्रुप बन रहे हैं, सब समुदाय से जुड़े किसी मसले पर हैं। जब मसला सुलझ जाता है, तो ग्रुप अपने आप खत्म हो जाता है।
महिमापत रे इस तरह से अपने ब्लॉक स्तर के अधिकारियों से जुड़े हैं। उन्होंने बताया कि ब्लॉक अधिकारियों ने आगे अपने ग्रुप बनाए हैं, जिनसे वे अपने अधीनस्थ कर्मचारियों से जुड़कर निचले स्तर का प्रबंधन संभालते हैं। इसके आगे शायद दिक्कत है। ब्लॉक स्तर से आगे इंटरनेट की क्नेक्टिविटी अच्छी नहीं है। फिर स्मार्टफोन भी अभी इतने निचले स्तर पर नहीं पहंुचा है। महिमापत रे ब्रॉडबैंड का इंतजार कर रहे हैं, ताकि डिजिटल इंडिया के तहत योजनाओं को आखिर तक जोड़ सकें। उन्हें उम्मीद है कि इससे प्रशासन सीधे नागरिकों से जुड़ जाएगा व उनके आपसी संबंध भी बेहतर होंगे।


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